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Saturday, November 13, 2010

एक सकारात्मक कदम

NCERT द्वारा राजस्थानी भाषा को स्थान दिया जाना मान्यता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.अब हमारी संसद को भी मान्यता देने में देरी नहीं करके प्रदेश की भावना का सम्मान करना चाहिए.

Friday, July 2, 2010

चिडपडाट

चिडपडाट मेरी पेली पोथी है।इण कविता संग्रे मांय कुल ३९ कवितावां है।जिण तरां कीं छांट्यां पड्णे सूं थोडो सुख मिळॆ पण बीं  ने मेह नीं कह्यो जा सके,फ़गत चिडपडाट ही कह्यो जा सकॆ,उणीज भांत मेरी पेली पोथी री कवितावां मांय कोई कविता पणो नीं है ,बस चिडपडाट ही है।          विश्वनाथ भाटी,तारानगर [चूरू ]                                                                        

        
 १
सुरसत मात सार दे
सुरसत माता सीस नवाउं सार दे ।
सदबुध दाता नित गुण गाउं,सार दे ॥

हिये अन्धारो औगुण हरणी,
ग्यान उजाळो मंगळ करणी,
वीणा री झणकार ताल सुर तार दे ॥

उजळो भेख घणो सुखकारी,
गावे गुणीजन महिमा थारी,
सिर पर धर दे हाथ,मात रो प्यार दे॥

चुग-चुग मोती माळ बणाउं,
सबदां रो संसार  सजाउं,
कविता नार सजे सोळा सिणगार दे  ॥

                 २
 दीवला जगतो रहीजॆ रॆ
दीवला जगतो रहीजॆ रॆ ।
अन्धियारो आंख्यां रे साम्ही आवेलो,
पूनडली रो झूंको बाट बुझावेलो,
साम्ही छाती ताण इणां सूं अडतो रहीजॆ रॆ ।

बियाबाण मांय मारग तूं नीं पावॆलो,
बगतां-बगतां राही तूं थक जावेलो,
मंजल नेडी जाण,बटेऊ बगतो रहीजे रे ।

सागर री छाती पर चलाणी नाव तनॆ,
तूफ़ानी लहरां रा घेरॆ दांव तनॆ,
लहरां री रग जाण,खेवटीया ठगतो रहीजॆ रॆ ।

बॆरयां री छाती मांय चुभणो काम तेरो,
मरणां रे पान्नॆ मांय मंडियो नाम तेरो,
बण अंगारो वीर ,सदांई सिलगतो रहीजे रॆ ।


                   ३
आ धरती राजस्थान री
घणी-घणी म्हारे मन भावॆ,मीरां री धर मान री ।
आ धरती राजस्थान री,आ धरती राजस्थान री ॥

मीरां सा मुळकणिया धोरा,सूरजडो चमकावे है,
पून भुंवाळा खांती चालॆ,खेजड हेत रळावे है,
रोहिडॆ रो रूप निराळो,कुदरत आ भगवान री,
आ धरती राजस्थान री,आ धरती राजस्थान री ॥

खड्यो खेत मांय खेतीखड,तेजॆ री तान सुणावॆ है,
अळगोजॆ रो साज़ सुरीळो,सावण रंग सरसावॆ है,
गीत सुरीळा तीजणियां रा,भोम गोग चहुआण री,
आ धरती राजस्थान री,आ धरती राजस्थान री ॥

काचर,बोर,मतीरा मीठा,सिट्टा सीर रळावॆ है,
रोट बाजरी,छाछ-राबडी,थाळ्यां भर-भर खावॆ है,
मिनखां री मिसरी सी बोली,कोयलडी रॆ गान री,
आ धरती राजस्थान री,आ धरती राजस्थान री ॥


                       ४
         राजस्थानी भोम
कोयल पाळॆ प्रीत,सुणावॆ गीत,मुरधरा मान री
राजस्थानी भोम,भोम भगवान री ॥
रणबांकुरा वीर अठॆ रा,मरणो मंगल मानता
सिर देणो पण पीठ नीं देणी,ब्रत सदां सूं जाणता
राणाजी री आन आ धरती,भामासा रे दान री
कण-कण सोन्नो निपजावे किरसाण री।
                             आ राजस्थान री ॥
मुळकणिया धोरां रे मांही मीरा मीत बुला लिन्यो
दादू अर रॆदास सरीखा,प्रेम-पंथ अपणा लिन्यो
चूंडावत सरदार री राणी हाडी रे सिर दान री
पन्ना धा रे अणकूंत्ये बलिदान री
                               आ राजस्थान री ॥
घर आयोडो मिनख देवता, रीत अठे रा जाणे है
प्रेम मांय छिपयोडो भगवान सदां पहिचाणे है
पण बॆरी रो काळ बणॆ है ,हम्मीर रे हठ ग्यान री
आंच न लागॆ आण जॊहर सणमान री
                                 आ राजस्थान री ॥
अर्जुन सेठी,विजय पथिक,जोशी,माणक सा लाल अठॆ
सागर गोपा रे साम्ही बॆरी री चालॆ चाल कठॆ
अमर सिंहणी काळी बाई,डूंगरपुर री जान री
कण-कण कथा सुणावॆ उण बलिदान री
                                  आ राजस्थान री ॥
मुरधर री माटी रो राजा,ऊंट घणो मन भावॆ है
खेजड्ल्यां सांगरियां बांटे,बाजरियो लॆरावे है
राबडी मिसरी सी लागॆ,खीचड कूटे धान री
मीठे जळ री पोट,पूनडी छांन री
                                  आ राजस्थान री ॥


                    ५.कविता तूं बणती रहीजॆ
कोयलडी, तूं प्रीत पाळ्जॆ
कागा कुरळाता रॆसी
तकता रॆसी टोपॆ-टोपॆ लोही नॆ।
बेलडी,तूं बधती रहीजॆ
प्रेम रो पंथ बणायो राखीजॆ
तोडणियां आता रेसी
तेरे बधतॆ नाळ नॆ।
किरसा ,तू तपतो रहीजॆ
नीं डरीजे,
बिरखा री काठ्मीठ सूं,
ओळा,आंधी,काळ
डराता रॆसी
तेरे श्रमदान नॆ ।
जुवानडा,तूं जागतो रहीजे
सींव माथॆ,
दिन अर रात,
बेरीडा तकता रॆसी
तेरॆ उचटते ध्यान नॆ ।
कविता,तूं बणती रहीजॆ
अंतस री आवाज़ सूं
धन अर नाम री भूख दबाती रहीजॆ
बकणिया तो बकता रॆसी
तेरे बधते मान नॆ ।

           ६.आओ आपां रूंख लगावां
रूंख हुवॆ पग-पग रा साथी,आओ आपां रूंख लगावां ॥
पडदादो सा नीम लगायो,यूं जाण्यो ज्यूं बेटो जायो
दोफ़ारी री तपती लू मांय, हॆटॆ बैठ घणो सुख पायो
पण पडपोतो सफ़ा बावळो,बीं पर जाय कंवाडो बायो
रोयो नीमडो मन ही मन मांय,लोकांहित करके पछतायो
रूंख उजाडन वाळां ने ,आओ आपां मिलजुल समझावां ॥

भाटो बायां भी फ़ळ देवॆ,बदळे मांय क्यूं इज नीं लेवॆ
सीतल छाया घणी सुहाणी,तेज तावडो सिर पर लेवे
शुद्ध पूनडी देवणवाळा,धरती माता रा रखवाळा
पांख-पंखेरू रो घर बासॆ,हिंड्णतांइ मोटा डाळा
हरियो सोन्नो,हरिया रूंखडा,रूंखाम री बातां बतळावां ॥

हरिया रूंख धरती सिनगारॆ,बिरखा बरसे रूंखां लारे
जीवण रो आधार रूंखडा,रूंख मोकळी आफ़त टाळे
फूल,फळी,जड,पत्ता,डाळा,सारा अंग इमरत रा प्याला
सेवा रा अवतार रूंखडा,सिवजी सा साधु मतवाळा
रूंख हुवॆ इमरत री घूंटी,बदळे मांय पाणी तो प्यावां ॥

सोच बावळा रूंख कट्यां सूं,धरती मां सुन्नी हू ज्यासी
तेरो सोन्नो सो ओ जीवन,बावळिया माटी मिल ज्यासी
सोच बावळा,जाग तावळा,रूंखां सूं हरियाळी ल्यावां ॥

             

 

Monday, June 21, 2010

Friday, May 21, 2010

राजस्थानी भाषा में एम.ए.

     राजस्थानी भाषा में एम.ए.
इसे दो वर्षों मे करना होता है.पेपर की जानकारी इस प्रकार है-
१.पूर्वार्द्द[चार पेपर]      २.उत्तरार्ध में [पांच पेपर]
पूर्वार्द्द
पैलो पेपर-आधुनिक राजस्थानी काव्य
१.वीर सतसई[सूर्य मल्ल मिसण]
२.राधा[सत्य प्रकाश जोशी]
३.लीलटांस [कन्हैयालाल सेठिया]
४.बादळी [चन्द्रसिंह बिरकाळी]{चारों पोथ्यां सुं एक-एक व्याख्या ४*९=३६,अर एक-एक प्रश्न ४*१६=६४}
दूजो पेपर-आधुनिक राजस्थानी गद्य
१.मांझल रात[लक्ष्मीकुमारी चूंडावत]
२.आधुनिक राजस्थानी कहाणियां[रावत सारस्वत अर प्रेमजी प्रेम ]
३.बुगचो[मूलदान देपावत]
४.राजस्थानी निबन्ध संग्रह[चन्द्रसिंह बिरकाळीच
तीजो पेपर-राजस्थानी भाषा अर साहित्य का इतिहास
[भाषा,बोली,प्राचीन,मध्य अर आधुनिक जुग रा प्रमुख सहित्यकार,पोथ्यां आद]
चोथो पेपर-राजस्थानी लोक साहित्य अर संत साहित्य
[दादु पंथ,रामस्नेही आद पंथां रो इतिहास]
                उत्तरार्ध
पैलो पेपर-मध्यकालीन अर प्राचीन काव्य
१.रणमल्ल छ्न्द[मूलचन्द प्राणेश]
२.हालां झालां रा कुंडलिया[मोतीलाल मेनारिया]
३.बेलि किरसण रुकमणी री[प्रिथ्वीराज राठोड]
४.मीरां व्रहद पदावली[प्रथम भाग-पद १०१]{चारों पोथ्यां सुं एक-एक व्याख्या ४*९=३६,अर एक-एक प्रश्न ४*१६=६४}
दूजो पेपर -मध्यकालीन अर प्राचीन गद्य
१.अचळदास खींची री वचनिका[शिवदास गाडण]
२.राजस्थानी साहित्य संग्रह{राजन राउत रो दोपहरो अर रामदास री आखडी}
३.कुंवरसीं सांखळो[डा.मनोहर सिंह]
४.जगदेव परमार री वात[डा.महावीर सिंह गहलोत]
तीजो पेपर-काव्य शास्त्र अर पाठालोचन
इकाई-१ साहित्य रो स्वरूप अर विवेचन,भारतीय अर पाश्चात्य दीठ,साहित्य र तत्त्व,काव्य री प्रेरणा अर प्रयोजन
इकाई-२ भारतीय काव्यशास्त्र{रस सिद्धान्त,रस निष्पति,साधारणीकरण,अल्म्कार सम्प्रदाय,वक्रोक्ति सिद्धान्त स्वरूप अर भेद,ध्वनि सिद्धान्त{ध्वनि रो अर्थ अर भेद}
इकाई-३ पाश्चात्य काव्य शास्त्र
{अरस्तु रा काव्य सिद्धान्त-अनुक्रति सिद्धान्त,विरेचन सिद्धान्त,काव्यरूपों का विवेचन}क्रोन्चे रो अभिव्यंजनावाद,आई.ए.रिचर्ड्स र काव्य सिद्धान्त{मूल्य सिद्धान्त}
इकाई-४राजस्थानी काव्याशास्त्र[छ्न्द शास्त्र रो परिचे,अलंकार,काव्यदोष]
इकाई-५ पाठालोचन री परिभाषा,स्वरूप और सिद्धान्त   [५*२०=१००]
चोथो पेपर-विशिष्ट सहित्यकार  [गणेशलाल व्यास ’उस्ताद’,आचार्य चतुरसिंह बावजी,ईसरदास]-कोई एक
पांचवों पेपर-निबन्ध [किण्ही एक विष्ये माथॆ राजस्थानी मे लेख लिखणो]
   राजस्थानी पोथ्यां सारु देखो सा-http://http/;//rajasthanibooks.blogspot.com  dekho sa http://www.marajasthani.blogspot.com/

Thursday, May 20, 2010

तूं के जाणॆ गूंगिया

                      तूं के जाणॆ गूंगिया
शूरां रे तकमा लागे,कायर काढे गाळ.ईं गाळ्यां रो राज,तू के जाणे गूंगिया.
भरी पडी रह माल सूं,सेठां री कोठ्यार.मरतो मरे गिंवार,तूं के जाणॆ गूंगिया
कुलटा,कायर,कुलछ्णी,पर घर दीखे चान्द सी,घर नारी सूं राड,तूं के जाणे गूंगिया.
भूखे ने धक्का घणा,घर में बामण जीमरया,जुग रो धरमाचार,तू के जाणे गूंगिया .
सूरत सूं बै सूगला,पण दास्यां पंखा झळे,लिछमीजी रो राज,तू के जाणे गूंगिया.
पढ्या-लिख्या पाणी भरॆ,अणपढ खावे माल,नेतावां री चाल,तू के जाणे गूंगिया.
निर्दोसी फ़ांस्यां चढ्ये,खून्यां री जॆकार,फ़ैल्यो भ्रस्टाचार,तू के जाणे गूंगिया
भोळो-डाळो आदमी,चढ्यो टंगारे चान्द पर,धरती हाल बेहाल ,तू के जाणे गूंगिया.
घर रे गमला मांय सज्या,अब कांटीला थो’र,तुळछां रो नीं गोर,तू के जाणे गूंगिया.
पाळे घर-घर गंडकडा,मुरगो देवे बांग,गऊ माता रे डांग,तू के जाणे गूंगिया.

Wednesday, May 19, 2010

राजस्थानी भौम

गीत                  राजस्थानी भौम
कोयल पाले प्रीत,सुणावे गीत,मुरधरा मान री,
रजस्थानी भौम,भौम भगवान री .
रणबांकुरा वीर अठॆ रा,मरणो मंगल मानता,
सिर देणो पण पीठ नीं देणी,ब्रत सदां सूं जाणता,
राणाजी री आन आ धरती,भामासा रे दान री,
कण-कण सोन्नो निपजावे,किरसाण री,
आ राजस्थान री.
मुलकणिया धोरां रे मांही,मीरां मीत बुला लिन्हो
दादू अर रैदास सरीखा,प्रेम पंथ अपणा लिन्हो,
चूण्डावत सरदार री राणी हाडी रॆ सिर-दान री,
पन्नाधा रॆ अणकूत्यॆ बलिदान री
आ राजस्थान री.
घर आयोडो मिनख देवता,रीत अठे रा जाणे है,
प्रेम पीड में छिपियोडो भगवान सदा पिछाणॆ है
पण बॆरी रो काळ बणॆ है,हम्मीर राणॆ हठ ग्यान री,
आंच नीं लागे आण जौहर सन्मान री,
आ राजस्थान री.
अर्जुन सेठी,विजय पथिक,जोशी,माणक सा लाल अठे
सागर गोपा रे साम्ही,बैरी री चाले चाल कठॆ
अमर सिंघणी काळी बाई,डूंगरपुर री जान री,
कण-कण कथा सुणावॆ उण बलिदान री
आ राजस्थान री.
मुरधर री माटी रो राजा,ऊंट घणो मन भावे है,
खेज़्डल्यां सांगरियां बांटे,बाजरियो लैरावे है,
राबडी मिसरी सी लागे,खीचड कूट्यॆ धान री,
मीठे जळ री लोट,पूनडी छान री
आ राजस्थान री.

आ धरती राजस्थान री

गीत            आ धरती राजस्थान री
      घणी-घणी म्हारे मन भावे,मीरां री धर मान री
      आ धरती रजस्थान री,आ धरती  राजस्थान री.
           मीरां सा मुळ्कणिया धोरा,सूरजडो चमकावे है
           पून भुंवाळा खांती चाले,खेजड हेत रळावे है,
           रोहिडे रो रूप निराळो,कुदरत आ भगवान री.
                            आ धरती  राजस्थान री.
           खड्यो खेत में खेतीखड,तेजॆ री तान सुणावे है,
           अळगोज़ॆ रो साज़ सुरीळो,सावण रंग सरसावे है,
           गीत सुरीळा तीजणियां रा,भौम गोग चौहाण री.
                             आ धरती राजस्थान  री.
           काचर,बोर,मतीरा मीठा,सिट्टा सीर रळावॆ है,
           रोट बाजरी,छाछ राबडी,थाळ्यां भर-भर खावॆ है,
           मिनखां री मिसरी सी बोली,कोयलडी रॆ गान री
                              आ धरती राजस्थान री.

Sunday, May 16, 2010

गांव रे घर घर में


भारत री पहचाण गांव रे घर घर में
हे हिन्द तेरी है शान गांव रे घर घर में.
चोकी ऊपर करे हथाई,
साथे मिल सॆ भाई भाई
ओलो राखे बूढी ताई
बाळ सुंवारे सत्तु नाई
है राम लखन सा भाई,गांव रे घर घर में
एक बटाऊ सॆंरे लागे,
जीमण बेठॆ सागे-सागे
होक्को राखे पागे पागे
हेत पळे चरखे रे तागे
मिणत रो जागण लागे,गांव रे घर घर में.
दादोसा री लम्बी आस
बो देहाती जीमण खास
गउवां ने हरयाळी घास
छोटी बहुवां मोटी सास
और दूध भरयो गिलाश,गांव रे घर घर में.
रेवड लादे गाळे गाळे
हींडा मांडे डाले डाळे
स्याळे में सॆ धूणी बाळे
प्याउडी काळॆ उन्याळे
मायड ज्युं गायड पाळे,गांव रे घर घर में.
गांव रहयो पढाइ मा लारे
बात बात में बात बिगाडे
दूजोडो क्युं छोड्या लारे
सॆ बातां आपां रे सारे,
दाळद क्यूं ढिगळी ढालॆ,गांव रे घर घर में

Saturday, May 15, 2010

         कविता तू बणती रहीजे
कोयलडी तू प्रीत पाळजे,
कागा कुरळाता रहसी,
तकता रहसी
टोपे-टोपे लोही नॆ .
बेलडी,तू बधती रहीजे
प्रेम रो पंथ बणायो राखीजे
तोडणिया आंता रहसी
तेरे बधते नाळ नॆ.
किरसा,तू तपतो रहीजे
नीं डरीजॆ, बिरखा री
काठ्मीठ सुं
ओळा,आंधी,काळ
डरांता रहसी
तेरे श्रमदान नॆ.
जुवानडा तू जागतो रहीजे
सींव माथे
दिन अर रात,
बेरीडा ताकता रहसी
तेरे उचटतॆ ध्यान नॆ.
कविता, तू बणती रहीजे
अंतस री आवाज़ सूं
धन अर नाम री भूख
दबाती रहीजे
बकणिया तो बकता रहसी
तेरे बधते नाम नॆ   
विश्वनाथ भाटी ,तारानगर

Friday, May 14, 2010

दोहा

१.क्यूँ नी खूयो रे नरां, जे खूयो धन-धान . पल्लो झड रीतो हुयो,खोयो है जे मान
२.भूख मरयां सूं हरि मिले, तो अजगर बड़ मान सेंसूं पेल्लां आ मिले, जंगल में भगवान
३.धर्म राखनो आप रो ,निज रा प्राण गुमाय .  घास नीं खावे केशरी,मांस नीं खावे गाय
४.बगत चलावे जगत ने ,बगत बड़ो बलराय,दुर्गत हुय री गाय री, बकरी महलां मांय
५.चोकी ऊपरबैठनो,रमणो चोपड़,ताश,म्हूँ तन्ने पूछूं गामडा,बो कठे प्यार बिशवास.
६.डाली-डाली झूलनो,झोटे-झोटे प्यार. आँगन-आँगन छेकती,बसी आज तकरार.
७.बणणो चावे आदमी,बातां सु भगवान, घट रे माहीं झांक ले ,पेल्लां बण इन्सान .
८.लोग बतावे बावला,करां नियम री बात,भैंस ऊणा री हूँ गयी,लाठी जिण रे हाथ
९.आम सरीको नीमड़ो,निमोल्याँ रसदार,खेजडल्यां खोखा घणा,मुरधर रो सत्कार
१०.खेतां मोरण मोरता,खांता धाप मतीर,आज बाजारा बिक रयो, बो संपत अर सीर.
११.कबड्डी खोखो हरदड़ो, मारदडी री मार,कुश्ती दंगल हूंवता, चर्चा बार त्योंहार .
१२. गुवाड़ गाम री सिमट गी,बंद हुई किलकार,टेलीविजना हूँ रई,किरकट री जेकारदोहा
१३.जागन जम्मा लागता,पाँचयूँ पून्युं खीर.टंकयां तुलग्यो दूधड़ो,तरसे गूगो पीर
१४.खीर खांड रो जीम्णों,मांही घी री धार,देशी घी खा टाबरी, पड्ज्या आज बीमार
१५.खेजडल्यां रो खातमो,धरती तरसे नीर,मिनख लाग रयो फोड़ बा ,धोरां री तकदीर.
१६.भाई भाई सु उठ्यो बिस्वे रो बिस्वास ,थाली मोखा करणिया,बनया फिरे है खास. 

Thursday, May 6, 2010

घर घर मोबाईल

आई आई जागनरी बरी घर घर मोबाईल
दुनिया सा भाजी जा री घर घर मोबाईल
कई जना हाथांमें राखे कोई कोई जेबांमें राखे
कई बेल्ट रे बांध्याँ राखे,डलेवरजी साम्या राखे,
रामुड़ो रोले में राखे,बाबुडो झोले में राखे
कान्हो कान लगायाँ राखे, सारीआज लुगायां राखे,
दुनिया इण री है कायल घर घर मोबाइल
मोटर साईकल साईकल वालो ,टेम्पू ट्रक ट्रेक्टर वालो,
ओट्टो वालो,सोत्तेवालो ,लियां फिरे है कोट्टे वालो
बोलेरो,तावेरो वालो,राखे जिजो राखे सालो,
राखे गधा गाडी वालो,झोटे वालो पाड्डी वालो
मिसकोल करे घायल घर घर मोबाइल
धर्मे रे धंधे री बातां,लिछु रे ललचाई बातां ,
सन्तु रे संचोडी बातां,उद्दे रे उल्झ्योड़ी बातां
गोमो करे गाम री बातां,खेतो करे खेत री बातां,
बर्जुड़ी कानुड़ी धापी ,हेती करे हेत री बातां
सब करे

Monday, May 3, 2010

मूर्ती अर भाटो

भाटो बोल्यो मूर्ती ने

मैतो पगां तले अर

तेरी पूजापाठ

आ के दूभांत ?

मूर्ती बोली भाया

पूजीवान हूवनो है तो

पैलां छिनी अर हथोड़ा री मार

तो सेवनी ही पडसी।

Friday, April 30, 2010

लघुकथा

 लघुकथा तीर्थयात्रा *विश्वनाथ भाटी " इस बार इच्छा है कि चारधाम कि यात्रा कर आऊं.सांसों का क्या भरोसा ,कब निकल जाये. "पार्वतीदेवी ने विजयबाबू के समक्ष अपनी बात रखी ."ठीक ही है अगर बेटा करवा रहा है तो कर ही आओ. "विजयबाबू ने अखबार का पन्ना पलटते हुए कहा. "ऐसा क्यों कहते हो,वो आपका बेटा नहीं है क्या ?""बेटा तो क्यों नहीं है मगर मैं उसे तुमसे ज्यादा जानता हूँ. इस बार भी कोई बहाना निकाल लेगा.""आपको भी है ना शक करने की आदत सी पड़ गयी है .पिछली बार तो ऐनमौके पर कंपनी का कामआ गया था वरना उसका तो पक्का पक्का मानस था.""मैं कब रोकता हूँ ,जाओ ना; यदि ले जाता है तो बढ़िया बात ही है""पोस्टमन..."गली में आवाज सुनाई दी .वह दौड़ी दौड़ी सी दरवाजे तक गयी .सुनील का ही ख़त था. उसकी आँखे चमक उठी ."यह लो ,सुनील का ख़त है शायद तीर्थयात्रा का समाचार भेजा हो."पार्वतीदेवी की नज़रें विजयबाबू के चेहरे पर टिक गयी."समाचार तो तीर्थयात्रा का ही है ,मगर किसी और का."विजयबाबू ने चश्मा अख़बार पर रखते हुए कहा. "और किसी का ;क्या मतलब?""लिखा है किअपने सास -ससुर को लेकर चारधाम कि यात्रा पर जा रहा हूँ.इस बार नहीं आ सकता .विचार मत करना .अचानक ही प्रोग्राम बन गया ."पार्वतीदेवी पत्थर बनी खुले पड़े ख़त को देखती जा रही थी. रसोईघर से सब्जी जलने कि गंध आ रही थी. विश्वनाथ भाटी ,वार्ड न ८,पो.तारानगर[चुरू] राजस्थान ०९४१३८८८२०९

Saturday, April 17, 2010

म्हारी भाषा

भाषा है संजीवनी जे कोई हडमान ल्यावे उठ बेठ्यो हुवे लिछमन राजस्थान