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Sunday, May 16, 2010

गांव रे घर घर में


भारत री पहचाण गांव रे घर घर में
हे हिन्द तेरी है शान गांव रे घर घर में.
चोकी ऊपर करे हथाई,
साथे मिल सॆ भाई भाई
ओलो राखे बूढी ताई
बाळ सुंवारे सत्तु नाई
है राम लखन सा भाई,गांव रे घर घर में
एक बटाऊ सॆंरे लागे,
जीमण बेठॆ सागे-सागे
होक्को राखे पागे पागे
हेत पळे चरखे रे तागे
मिणत रो जागण लागे,गांव रे घर घर में.
दादोसा री लम्बी आस
बो देहाती जीमण खास
गउवां ने हरयाळी घास
छोटी बहुवां मोटी सास
और दूध भरयो गिलाश,गांव रे घर घर में.
रेवड लादे गाळे गाळे
हींडा मांडे डाले डाळे
स्याळे में सॆ धूणी बाळे
प्याउडी काळॆ उन्याळे
मायड ज्युं गायड पाळे,गांव रे घर घर में.
गांव रहयो पढाइ मा लारे
बात बात में बात बिगाडे
दूजोडो क्युं छोड्या लारे
सॆ बातां आपां रे सारे,
दाळद क्यूं ढिगळी ढालॆ,गांव रे घर घर में

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